ओशो : प्रेम.. शब्द नही, घटना नही, ...
प्रेम..
शब्द नही,
घटना नही,
दिखता नही,
कहा भी नही जाता,
सिर्फ महसूस होता है,
दिल की गहराइयो में, एकदम गहरे,
जिसमे डूबना होता है,
फिर कुछ होश ही नही रहता, एक ऐसा आनंद, जिसका वर्णन नही किया जा सकता,
जो शब्दों में नही समाता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
पर शर्त यह है कि प्रेम बेशर्त हो!
जिसमे शब्द न हो, अपेक्षा न हो,
जो कहा नही सिर्फ किया जाये! आत्मा से, दिल की गहराइयो से,
जो निरंतर हो,
जिसमे तड़प हो,
समर्पण हो, प्यास हो.
ओशो
शब्द नही,
घटना नही,
दिखता नही,
कहा भी नही जाता,
सिर्फ महसूस होता है,
दिल की गहराइयो में, एकदम गहरे,
जिसमे डूबना होता है,
फिर कुछ होश ही नही रहता, एक ऐसा आनंद, जिसका वर्णन नही किया जा सकता,
जो शब्दों में नही समाता, सिर्फ महसूस किया जा सकता है।
पर शर्त यह है कि प्रेम बेशर्त हो!
जिसमे शब्द न हो, अपेक्षा न हो,
जो कहा नही सिर्फ किया जाये! आत्मा से, दिल की गहराइयो से,
जो निरंतर हो,
जिसमे तड़प हो,
समर्पण हो, प्यास हो.
ओशो
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