ओशो : प्रेम अपने आप में इतना बड़ा पुरस्कार है, और क्या मांगना है?
तुम किसी के प्रेम में हो और कोई पूछे कि तुम क्यों प्रेम में हो, किसलिए प्रेम में हो, क्या पाना चाहते हो? अगर तुम उत्तर दे सको, तो तुम्हारा प्रेम गलत। अगर तुम कह सको कि इस स्त्री के बाप के पास बहुत धन है, अकेली बेटी है, इसलिए प्रेम में हैं, तो तुम प्रेम में हो ही नहीं। तुम अगर प्रेम में हो तो तुम कहोगे—बस प्रेम के कारण प्रेम में हूं। प्रेम की वजह से प्रेम में हूं इसके पीछे और कोई लक्ष्य नहीं। प्रेम अपने आप में इतना बड़ा पुरस्कार है, और क्या मांगना है?
ओशो
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