ओशो : आत्मज्ञान
आत्मज्ञान
शास्त्रों से नहीं मिलता ज्ञान।
ज्ञान तो मिलता है स्वयं में प्रवेश से।
कितना ही जान लो कुरान और
बाइबिल और पुराण और वेद और उपनिषद – नहीं कुछ होगा।
हां अपने को जान लोगे तो फिर कुरान में भी बहुत कुछ पाओगे, क्योंकि वह भी किसी अपने को जाने हुए आदमी की वाणी है।
फिर गीता में भी बहुत कुछ पाओगे।
मगर पहली अनुभूति तो अपने भीतर होनी चाहिए।
पहली किरण तो अपने भीतर टूटनी चाहिए।
तुम्हारे हाथ में दिया हो तो तुम्हें गीता में बहुत खजाने मिलेंगे खजाने वहां है।
लेकिन तुम्हारे हाथ में दिया न हों तो क्या खाक वहां पाओगे !!
ओशो
शास्त्रों से नहीं मिलता ज्ञान।
ज्ञान तो मिलता है स्वयं में प्रवेश से।
कितना ही जान लो कुरान और
बाइबिल और पुराण और वेद और उपनिषद – नहीं कुछ होगा।
हां अपने को जान लोगे तो फिर कुरान में भी बहुत कुछ पाओगे, क्योंकि वह भी किसी अपने को जाने हुए आदमी की वाणी है।
फिर गीता में भी बहुत कुछ पाओगे।
मगर पहली अनुभूति तो अपने भीतर होनी चाहिए।
पहली किरण तो अपने भीतर टूटनी चाहिए।
तुम्हारे हाथ में दिया हो तो तुम्हें गीता में बहुत खजाने मिलेंगे खजाने वहां है।
लेकिन तुम्हारे हाथ में दिया न हों तो क्या खाक वहां पाओगे !!
ओशो
Comments
Post a Comment