ओशो : स्वर्णिम बचपन
* एक बुद्ध पुरूष का विद्रोही बचपन *
पृथ्वी पर हजारों मूर्ख प्रतिक्षण सम्भोग कर रहे हैं और लाखों अजन्मी आत्माएं किसी भी गर्भ में प्रवेश करने को तैयार हैं मैंने उपयुक्त क्षण की प्रतीक्षा में सात सौ साल इन्तजार किया और असितत्व का धन्यवाद की वह क्षण मुझे मिल गया लाखों वर्षों की तुलना में सात सौ साल कुछ भी नहीं हैं केवल सात सौ साल हाँ मैं कह रहा हूँ 'केवल! और मैंने एक बहुत ही गरीब लेकिन बहुत ही अंतरंग दम्पति को चुना।
मेरे पिता के हृदय में मेरी माँ के लिए इतना प्रेम था की मैं नहीं सोचता हूँ की कभी उन्होंने किसी दूसरी स्त्री को उस दृस्टि से देखा हो यह कल्पना करना भी असम्भव है मेरे लिए भी--जो की कुछ भी कल्पना कर सकता है--की मेरी माँ ने स्वप्न में भी किसी और पुरुष के बारे में सोचा हो--यह असम्भव है मैंने दोनों को जाना है वे इतने घनिष्ठ थे एक दूसरे के प्रति इतने प्रेमपूर्ण थे इतने संतुष्ट थे हालांकि गरीब थे--गरीब फिर भी अमीर इस घनिष्ठता और परस्पर प्रेम के कारण ही वे गरीबी में भी इतने सम्रद्ध थे।
सौभाग्य से मैने कभी भी अपने माता पिता को झगड़ते नहीं देखा मैं कहता हूँ 'सौभाग्य' से क्योंकि ऐसे पति पत्नी खोजना बहुत ही मुश्किल है जो झगड़ते न हों सिर्फ परमात्मा ही जानता है की ऐसे लोगों के पास प्रेम के लिए समय कब होता है या शायद वह भी नहीं जानता आखिर उसे भी तो अपनी पत्नी की परवाह करनी पड़ती है विशेषकर हिन्दू परमात्मा को कम से कम ईसाई परमात्मा अधिक सुखी है उसकी कोई पत्नी नहीं है पत्नी तो क्या कोई स्त्री ही नहीं है क्योंकि स्त्री पत्नी से भी अधिक खतरनाक होती है पत्नी की तो तुम उपेक्षा कर सकते हो लेकिन एक स्त्री...तुम फिर मूर्ख बने तुम स्त्री की उपेक्षा नहीं कर सकते वह तुम्हें आकर्षित करती है पत्नी तुम्हें विकर्षित करती है।
जरा मेरी अंग्रेजी तो देखो इसको 'इंवर्टेड कामाज 'में लिखो ताकि कोई मुझको गलत न समझे यद्यपि तुम चाहे जो करो लोग तो मुझे गलत ही समझेंगे लेकिन फिर भी कोशिश करो उदाहरण चिन्ह में लिखो : पत्नी ' विकर्षित' करती है स्त्री 'आकर्षित" करती है।
मैंने अपने माता पिता को कभी झगड़ते नहीं देखा एक दुसरे को तंग करते हुए भी कभी नहीं देखा लोग चमत्कारों की बात करते हैं मैंने एक चमत्कार देखा है मेरी माँ ने मेरे पिता को कभी तंग नहीं किया यह चमत्कार है क्योकि सदियों से पुरुष ने स्त्रियों को इतना दबा कर रखा है की उसने परोक्ष रास्ते तलाश लिए है। वह उनका सर खाती है सिर खाना असल में छुपी हुई हिंसा है मैंने अपने माता पिता को कभी झगड़ते हुए नहीं देखा।
जब मेरे पिता की मृत्यु हुई तो मैं अपनी माँ के बारे में चिंतित था मैं सोच भी नहीं सकता था की वे जिन्दा रहेंगी उन दोनों ने एक दूसरे को इतना प्रेम किया था की वे लगभग एक ही हो गए थे वे बच पाईं क्योंकि वे मुझे भी बहुत प्रेम करती थीं ।
उनके बारे में मैं हमेशा चिंतित रहा हूँ मैं उन्हें अपने पास ही रखना चाहता था ताकि उनकी मृत्यु परम संतुष्टि में हो सके अब मैं जानता हूँ मैंने उन्हें देखा है मैंने उनके भीतर देखा है और मैं तुमसे कह सकता हूँ--और तुम्हारे द्वारा एक दिन सारे संसार को मालुम होगा--की वे बुद्धत्व को उपलब्ध हो गई हैं मैं उनका अंतिम मोह था अब उनके लिए कोई मोह नहीं रह गया वे एक सम्बुद्ध महिला हैं--अशिक्षित सरल उनको तो यह भी नहीं मालूम की बुद्धत्व क्या होता है यही तो सौंदर्य है! कोई बुद्ध हो सकता है बिना यह जाने की बुद्धत्व क्या है और इससे उल्टा भी हो सकता है : कोई बुद्धत्व के बारे में सब जान सकता है और फिर भी अबुद्ध बना रह सकता है।
मैंने इस दम्पति को चुना--सीधे-साधे सरल ग्रामीण । मैं राजाओं और रानियों को भी चुन सकता था यह मेरे हाथ में था सब प्रकार के माता पिता उपलब्ध थे पर मैं बहुत ही सरल और सादी रूचि का व्यक्ति हूँ --मैं हमेशा सर्वोत्तम से संतुष्ट हो जाता हूँ यह दम्पति गरीब था बहुत गरीब तुम समझ न सकोगे की मेरे पिता के पास केवल सात सौ रूपये थे यही उनकी कुल संपत्ति थी फिर भी मैंने उनको अपना पिता चुना उनके पास एक सम्पन्नता थी जिसे आँखें नहीं देख सकतीं; एक अभिजात्य था जो दिखाई नहीं देता।
तुम में से बहुतों ने उन्हें देखा है और निश्चित ही उनके सौंदर्य को अनुभव किया होगा वे सीधे बहुत सीधे और सरल थे तुम उन्हें ग्रामीण कह सकते हो लेकिन वह बहुत सम्रद्ध थे--सांसारिक अर्थों में नहीं 'लेकिन अगर कोई पारलौकिक अर्थ है...
ओशो, स्वर्णिम बचपन
पृथ्वी पर हजारों मूर्ख प्रतिक्षण सम्भोग कर रहे हैं और लाखों अजन्मी आत्माएं किसी भी गर्भ में प्रवेश करने को तैयार हैं मैंने उपयुक्त क्षण की प्रतीक्षा में सात सौ साल इन्तजार किया और असितत्व का धन्यवाद की वह क्षण मुझे मिल गया लाखों वर्षों की तुलना में सात सौ साल कुछ भी नहीं हैं केवल सात सौ साल हाँ मैं कह रहा हूँ 'केवल! और मैंने एक बहुत ही गरीब लेकिन बहुत ही अंतरंग दम्पति को चुना।
मेरे पिता के हृदय में मेरी माँ के लिए इतना प्रेम था की मैं नहीं सोचता हूँ की कभी उन्होंने किसी दूसरी स्त्री को उस दृस्टि से देखा हो यह कल्पना करना भी असम्भव है मेरे लिए भी--जो की कुछ भी कल्पना कर सकता है--की मेरी माँ ने स्वप्न में भी किसी और पुरुष के बारे में सोचा हो--यह असम्भव है मैंने दोनों को जाना है वे इतने घनिष्ठ थे एक दूसरे के प्रति इतने प्रेमपूर्ण थे इतने संतुष्ट थे हालांकि गरीब थे--गरीब फिर भी अमीर इस घनिष्ठता और परस्पर प्रेम के कारण ही वे गरीबी में भी इतने सम्रद्ध थे।
सौभाग्य से मैने कभी भी अपने माता पिता को झगड़ते नहीं देखा मैं कहता हूँ 'सौभाग्य' से क्योंकि ऐसे पति पत्नी खोजना बहुत ही मुश्किल है जो झगड़ते न हों सिर्फ परमात्मा ही जानता है की ऐसे लोगों के पास प्रेम के लिए समय कब होता है या शायद वह भी नहीं जानता आखिर उसे भी तो अपनी पत्नी की परवाह करनी पड़ती है विशेषकर हिन्दू परमात्मा को कम से कम ईसाई परमात्मा अधिक सुखी है उसकी कोई पत्नी नहीं है पत्नी तो क्या कोई स्त्री ही नहीं है क्योंकि स्त्री पत्नी से भी अधिक खतरनाक होती है पत्नी की तो तुम उपेक्षा कर सकते हो लेकिन एक स्त्री...तुम फिर मूर्ख बने तुम स्त्री की उपेक्षा नहीं कर सकते वह तुम्हें आकर्षित करती है पत्नी तुम्हें विकर्षित करती है।
जरा मेरी अंग्रेजी तो देखो इसको 'इंवर्टेड कामाज 'में लिखो ताकि कोई मुझको गलत न समझे यद्यपि तुम चाहे जो करो लोग तो मुझे गलत ही समझेंगे लेकिन फिर भी कोशिश करो उदाहरण चिन्ह में लिखो : पत्नी ' विकर्षित' करती है स्त्री 'आकर्षित" करती है।
मैंने अपने माता पिता को कभी झगड़ते नहीं देखा एक दुसरे को तंग करते हुए भी कभी नहीं देखा लोग चमत्कारों की बात करते हैं मैंने एक चमत्कार देखा है मेरी माँ ने मेरे पिता को कभी तंग नहीं किया यह चमत्कार है क्योकि सदियों से पुरुष ने स्त्रियों को इतना दबा कर रखा है की उसने परोक्ष रास्ते तलाश लिए है। वह उनका सर खाती है सिर खाना असल में छुपी हुई हिंसा है मैंने अपने माता पिता को कभी झगड़ते हुए नहीं देखा।
जब मेरे पिता की मृत्यु हुई तो मैं अपनी माँ के बारे में चिंतित था मैं सोच भी नहीं सकता था की वे जिन्दा रहेंगी उन दोनों ने एक दूसरे को इतना प्रेम किया था की वे लगभग एक ही हो गए थे वे बच पाईं क्योंकि वे मुझे भी बहुत प्रेम करती थीं ।
उनके बारे में मैं हमेशा चिंतित रहा हूँ मैं उन्हें अपने पास ही रखना चाहता था ताकि उनकी मृत्यु परम संतुष्टि में हो सके अब मैं जानता हूँ मैंने उन्हें देखा है मैंने उनके भीतर देखा है और मैं तुमसे कह सकता हूँ--और तुम्हारे द्वारा एक दिन सारे संसार को मालुम होगा--की वे बुद्धत्व को उपलब्ध हो गई हैं मैं उनका अंतिम मोह था अब उनके लिए कोई मोह नहीं रह गया वे एक सम्बुद्ध महिला हैं--अशिक्षित सरल उनको तो यह भी नहीं मालूम की बुद्धत्व क्या होता है यही तो सौंदर्य है! कोई बुद्ध हो सकता है बिना यह जाने की बुद्धत्व क्या है और इससे उल्टा भी हो सकता है : कोई बुद्धत्व के बारे में सब जान सकता है और फिर भी अबुद्ध बना रह सकता है।
मैंने इस दम्पति को चुना--सीधे-साधे सरल ग्रामीण । मैं राजाओं और रानियों को भी चुन सकता था यह मेरे हाथ में था सब प्रकार के माता पिता उपलब्ध थे पर मैं बहुत ही सरल और सादी रूचि का व्यक्ति हूँ --मैं हमेशा सर्वोत्तम से संतुष्ट हो जाता हूँ यह दम्पति गरीब था बहुत गरीब तुम समझ न सकोगे की मेरे पिता के पास केवल सात सौ रूपये थे यही उनकी कुल संपत्ति थी फिर भी मैंने उनको अपना पिता चुना उनके पास एक सम्पन्नता थी जिसे आँखें नहीं देख सकतीं; एक अभिजात्य था जो दिखाई नहीं देता।
तुम में से बहुतों ने उन्हें देखा है और निश्चित ही उनके सौंदर्य को अनुभव किया होगा वे सीधे बहुत सीधे और सरल थे तुम उन्हें ग्रामीण कह सकते हो लेकिन वह बहुत सम्रद्ध थे--सांसारिक अर्थों में नहीं 'लेकिन अगर कोई पारलौकिक अर्थ है...
ओशो, स्वर्णिम बचपन
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