ओशो : ध्यान विधि ! विपरीत विचार!

ध्यान विधि ! विपरीत विचार!

यह एक सुंदर व
उपयोगी विधि है।

उदाहरण के लिए-
यदि आप बहुत
असंतुष्ट महसूस कर रहे हैं,
तो उसके विपरीत
संतोष का मनन करें
संतोष क्या है?
एक संतुलन लाएं।
अगर आपके मन में
क्रोध उठ रहा है,
तो करुणा को ले आएं,
करुणा के बारे में
विचार करें।
और, तुरंत
आपकी भाव दशा
बदलने लगेगी,

क्योंकि दोनों एक ही हैं,
विपरीत भी वही ऊर्जा है।
जैसे ही आप
विपरीत भाव-दशा को
ले आते हैं,
तो वह
पहली भव-दशा को
पी जाती है,
अपने में
समाहित कर लेती है।

तो अगर क्रोध हो तो
करुणा पर मनन करें।

एक काम करें :
बुद्ध की
एक मूर्ति रख लें,
क्योंकि बुद्ध की मूर्ति
करुणा की मूर्ति है।
जब भी क्रोध उठे,
अपने कमरे में चले जाएं,
बुद्ध को देखें,
बुद्ध की तरह बैठ जाएं
और
करुणा का भाव करें।
अचानक ही
आप देखेंगे कि
आपके भीतर
एक रूपांतरण
होने लगा है।
क्रोध विलीन होने लगा,
उत्तेजना चली गई,
करुणा पैदा होने लगी।

और यक कोई
दूसरी ऊर्जा नहीं है।
वही ऊर्जा है-
वही क्रोध वाली ऊर्जा-
लेकिन इसका
गुणधर्म बदल गया,
यह ऊपर उठने लगी है।

!! ओशो !!

[ध्यान विज्ञान] ध्यान सूत्र

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