ओशो : ध्यान विधि

ध्यान विधि

एक काम करना : बुद्ध की प्रतिमा रखना ।
क्योंकि वह प्रतिमा करुणा की मुद्रा है। जब भी तुम क्रोधित होते हो, भीतर कमरे में जाना, बुद्ध की ओर देखना, बुद्ध की भाँति बैठ जाना और अनुभव करना करुणा को । अचानक तुम पाओगे, तुम्हारे भीतर रूपांतरण घट रहा है : क्रोध रूपांतरित हो रहा है, उत्‍तेजना खो रही है - करूणा उदित हो रही है । और यह कोई भिन्न ऊर्जा नहीं है; यह वही ऊर्जा है- क्रोध की ही ऊर्जा अपनी गुणवत्ता बदल रही है, ऊपर उठ रही है ।
                                         ओशो

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