ओशो : साधना ज़रूरी है ताकि आदतों की सूखी रेखाएं मिट सकें ।

साधना ज़रूरी है ताकि आदतों की सूखी रेखाएं मिट सकें

क्रोध, नफरत, काम सब कर्म की सूखी रेखाएं है


प्रत्येक पर निर्भर है कि जीवन का आप क्या करेंगे।

जीवन निर्भर नहीं है, जीवन अवसर है। उसमें क्या करेंगे, यह आप पर निर्भर है। यह निर्भरता ही आपके आत्मवान होने का गौरव है। आपके पास आत्मा है, अर्थात चुनाव की शक्ति है कि आप चुने कि क्या करेंगे।

और मजे की बात यह है कि हजारों चक्कर लगाए हों, तो सारे चक्कर इसी क्षण छोड़ सकते हैं, तोड़ सकते हैं। लेकिन मन लीस्ट रेजिस्टेंट की तरफ बहता है।

घर में एक लोटा पानी गिरा दे। फर्श पर बह जाए, सूख जाए, पानी उड़ जाए; लेकिन एक सूखी रेखा फर्श पर छूट जाती है। पानी नहीं है जरा भी। कुछ भी मतलब नहीं है। फिर दुबारा पानी उस कमरे में डोल दें, सौ में से निन्यानबे मौके यह हैं कि पानी उसी सूखी रेखा को पकड़कर फिर बहेगा।

क्योंकि लीस्ट रेसिस्टेंस है। उस सूखी रेखा पर धूल कम है। कमरे के दूसरे हिस्सों में धूल ज्यादा है। वहां जगह जरा आसानी से बहने की है। पानी वहीं से बहेगा।

हम बहुत बार जो किए है, वहां - वहां सूखी रेखाएं बन गई है। उन रेखाओं को ही मनस - शास्त्र संस्कार कहता है। यह हमारी कंडीशनिंग है। उन सूखी रेखाओ पर फिर वही काम, फिर शक्ति का जन्म, फिर पानी का बहना, लीस्ट रेसिस्टेंस, फिर हम वही से बहना शुरू कर देते हैं।

लेकिन सूखी रेखा कहती नहीं कि यहां से बहो। सूखी रेखा बांधती नहीं बहे, तो अदालत में मुकदमा चलेगा। सूखी रेखा कहती नहीं कि कोई नियम है ऐसा कि यहीं से बहना पड़ेगा, कि परमात्मा की आज्ञा है कि यहीं से बहो।

सूखी रेखा सिर्फ एक खुला अवसर है, चुनाव सदा आपका है। और पानी अगर तय कर ले कि नहीं बहना है सूखी रेखा से, तो नहीं रेखा बना ले और बह जाए। फिर नई सूखी रेखा बन जाएगी। फिर नया संस्कार बन जाएगा।

धर्म निर्णय और संकल्प है; जो होता रहा है, उससे अन्यथा होने की चेष्टा है; जो कल तक हुआ है, उसकी समझ से वैसा दुबारा न हो, इसका संकल्पपूर्वक चुनाव है।
 इसे हम साधना कहें, योग कहें, जो भी नाम दे सकते हैं।

ओशो
गीता दर्शन

Comments

Popular posts from this blog

ओशो : आपने कहा कि आपके भीतर सोई हुई उर्जा जब विराट की ऊर्जा से मिलती है तब एक्सप्लोजन, विस्फोट होता है। तो एक्सप्लोजन या समाधि के लिए कुंडलिनी जागरण और ग्रेस का मिलन आवश्यक है या कुंडलिनी का सहस्रार तक विकास और ग्रेस की उपलब्धि एक बात है?

ओशो : समय रहते जाग जाओ तो ठीक। क्योंकि जो समय हाथ से चला गया उसे वापस नहीं लौटाया जा सकता।

ओशो : यह जीवन सपना है ...