ओशो : संन्यास और संसार

संन्यास और संसार

हेनरी फोर्ड अपने लड़कों को सड़क पर जूता पालिश करने भिजवाता था;
वह कहता था,
अपने जेब का खर्च तुम खुद ही पैदा करो।
दुनिया का सबसे बड़ा अरबपति!
पड़ोसियों ने भी उससे कहा कि यह ज्यादती है, यह तुम क्या करवा रहे हो?

उसने कहा कि मैंने खुद जूते पालिश कर-कर के पैसा कमाया है। जो मेरे जमाने में धनपति थे, भीख मांग रहे हैं। मैं भिखमंगा था; मैं आज दुनिया का सबसे बड़ा करोड़पति हो गया हूं। मैं अपने बच्चों को भिखमंगा नहीं बनाना चाहता, इसलिए उन्हें जूते पर पालिश करने सड़क पर भेजता हूं।

वह आदमी होशियार था।
वह आदमी कुशल था। धनपतियों के बच्चे अक्सर मुर्दा हो जाते हैं, गोबर-गणेश हो जाते हैं। उनको खोदो तो गोबर ही गोबर पाओगे, गणेश कहीं भी न मिलेंगे; क्योंकि जीवन की चुनौती नहीं है, संघर्षण नहीं है।

तुमने कभी खयाल किया,
बहुत सुविधा-संपन्न घरों के बच्चे बुद्धिमान नहीं होते। हो नहीं सकते; चुनौती नहीं है। सारे बुद्धिमान बच्चे उन घरों से आते हैं, जहां बड़ा संघर्ष करना पड़ता है; जहां छोटी-छोटी बात को पाना मुश्किल है। करोड़पतियों के बच्चे अक्सर व्यर्थ होते हैं।

अगर बहुत सुरक्षा मिले और कोई संघर्ष न हो, तो रीढ़ टूट जाती है। रीढ़ बनती ही संघर्ष में है। जितना तुम संघर्ष लेते हो, उतनी ही रीढ़ पैदा होती है; उतने ही तुम मजबूत होते हो।

संसार से भागने को मैं नहीं कहता,
मैं संसार से जागने को कहता हूं।
संन्यास भगोड़ापन नहीं है, संन्यास महान संघर्ष है जागरण का। और जहां चुनौती है, वहां से हट मत जाना। हां, जब तक चुनौती का काम ही पूरा न हो जाए, तब तक तो टिके ही रहना।

और जल्दी ही काम पूरा हो सकता है।
अगर भागने की वृत्ति न हो, तो जल्दी ही जागना हो सकता है; क्योंकि वही शक्ति जो भागने में लगती है, वही जागने में लग जाती है।

और मैं तुमसे कहता हूं,
परमात्मा को पाना हो तो तुम भागना मत।
भगोड़ों से परमात्मा का कभी कोई संबंध नहीं जुड़ता। कायरों से संबंध जुड़ भी कैसे सकता है? चुनौती स्वीकार करने वाला साहस चाहिए।

माना कि साहस में गिरना भी होता है,
चोट भी खानी होती है। लेकिन वही मार्ग है, वही एकमात्र मार्ग है, और कोई मार्ग नहीं है।

ओशो
भज गोविंदम मूढ़मते

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