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ओशो : जीवन क्या है ?
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तुम जीवन में तभी अर्थ पा सकते हो जब तुम इसे निर्मित करते हो ।
आपने कहा कि आपके भीतर सोई हुई उर्जा जब विराट की ऊर्जा से मिलती है तब एक्सप्लोजन, विस्फोट होता है। तो एक्सप्लोजन या समाधि के लिए कुंडलिनी जागरण और ग्रेस का मिलन आवश्यक है या कुंडलिनी का सहस्रार तक विकास और ग्रेस की उपलब्धि एक बात है? असली में विस्फोट एक शक्ति से कभी नहीं होता, विस्फोट सदा दो शक्तियों का मिलन है। एक्सप्लोजन जो है, वह एक शक्ति से कभी नहीं होता। अगर एक शक्ति से होता तो कभी का हो जाता। तुम्हारी माचिस भी रखी है, और तुम्हारी माचिस की काड़ी भी रखी है, वह रखी रहे अनंत-अनंत जन्मो तक--एक इंच के फासले पर, तो आग पैदा नही होगी। उस विस्फोट के लिए दोनों की रगड़ जरुरी है तो हीं आग पैदा होगी। वह छिपी है दोनों में, लेकिन किसी एक में भी अकेले पैदा होने का उपाय नहीं है। जो विस्फोट है, वह दो शक्तियों के मिलन पर पैदा हुई संभावना है। तो जो हमारा अंतिम चरम बिंदु है कुंडलिनी का, सहस्रार, वह हमारा द्वार है, ग्रेस सदा हीं खड़ी हुई है, जिस द्वार पर परमात्मा निरंतर तुम्हारी प्रतिक्षा कर रहा है। लेकिन तुम हीं अपने द्वार पर नहीं हो, तो तुम्हें अपने द्वार तक आना है, वहां मिलन हो जाएगा। और वह मि...
समय रहते जाग जाओ तो ठीक। क्योंकि जो समय हाथ से चला गया उसे वापस नहीं लौटाया जा सकता। जो क्षण बीत गए, वे बीत ही गए; उन्हें फिर से जीने की कोई सुविधा नहीं है। समय कोई ऐसी संपत्ति नहीं है जिसे तुम खोकर फिर पा सकोगे। इस संसार में सभी चीजें खो कर पाई जा सकती हैं, समय नहीं पाया जा सकता। इसलिए समय इस संसार में सबसे ज्यादा बहुमूल्य हैः गया, तो गया। और उसी के संबंध में हम सबसे ज्यादा लापरवाह हैं। लापरवाह ही नहीं हैं; लोग बैठ कर ताश खेल रहे हैं, शराब पी रहे हैं। पूछो, क्या कर रहे हो; वे कहते हैं, समय काट रहे हैं, समय काटे नहीं कटता। समय तुम्हें काट रहा है, पागलो! तुम समय को न काट सकोगे। समय को तुम क्या काटोगे? तुम समय को कैसे काटोगे? समय पर तो तुम्हारी कोई पकड़ ही नहीं है। समय तुम्हें काट रहा है; तुम सोचते हो तुम समय को काट रहे हो। अखीर में पाओगे, समय तो नहीं कटा, तुम ही कट गए। अखीर में पाओगे, समय तो नहीं मरा, तुम्हीं मर गए। ध्यान रखना, समय नहीं बीत रहा है, तुम ही बीत रहे हो। समय नहीं जा रहा है, तुम ही बहे जा रहे हो। समय तो एक अर्थ में वहीं का वहीं हैः लेकिन तुम आते हो, चले जाते हो; तुम्हारी...
यह जीवन सपना है, यह टूटेगा, इसके टूटने में ही कल्याण है ! इसके टूटने में सौभाग्य है , वरदान है ! क्योंकि यह सपना टूटे , तो परमात्मा से मिलन हो ! यह विराग जगे संसार से , तो परमात्मा में राग जगे ! ओशो
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