ओशो के अनमोल रत्न

सवाल  ये नहीं है कि कितना सीखा जा सकता है…

इसके उलट , सवाल ये है कि कितना भुलाया जा सकता है ।

उस तरह मत चलिए जिस तरह डर आपको चलाये ।

उस तरह चलिए जिस तरह प्रेम आपको चलाये ।

उस तरह चलिए जिस तरह ख़ुशी आपको चलाये ।

ओशो


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