ओशो के सुंदर विचार

वैसा अपने को बनाओ, जैसा तुम चाहते हो दूसरे हों। तुम चाहते हो दूसरे सत्यवादी हों, सत्यवादी हो जाओ। क्योंकि दूसरे भी यही चाहते हैं। तुम चाहते हो दूसरे क्रोध न करें, तुम क्रोध न करो।

तुम चाहते हो दूसरे प्रेमवान हों, तुम प्रेमवान हो जाओ। 

इसे तुम सूत्र समझ लो।

बड़ा बहुमूल्य सूत्र है। 

इससे तुम धर्म की कसौटी कर लोगे।

तुम जो चाहते हो कि दूसरे करें, दूसरे हों, वैसे ही तुम होने लगो, वही तुम्हारे जीवन का शास्त्र है।

कहीं और खोजना नहीं है।

ओशो

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