ओशो : तो तुम्हे मिला है, उसके प्रति धन्यवाद से भरो।

तुम दुखी हो सकते हो, तुम शिकायते किये चले जा सकते हो कि जीवन ने तुम्हारे साथ न्याय नहीं किया। लेकिन स्मरण रखो कि शिकायत का तुम्हारा यह दृष्टिकोण तुम्हे और भी दुखी करता चला जाएगा क्योंकि तुम उस सबसे चूकते जाओगे जो तुम्हे दिया गया है। तो तुम्हे मिला है, उसके प्रति धन्यवाद से भरो। और जीवन ने तुम्हे इतना दिया है कि हर धन्यवाद छोटा पड़ जाये। तुम अहोभाव से जीते हो, तो तुम पोषित होते हो।

                        
ओशो
प्रेम को प्रार्थना बनाओ

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