ओशो : मुझे कब और कितनी बार ध्यान करना चाहिए ?

 मुझे कब और कितनी बार ध्यान करना चाहिए ?


यहां तक ​​कि अगर आपको भोजन करना छोड़ना पड़े, तो छोड़ दें ... लेकिन ध्यान करना न छोड़ें।


आप जितने अधिक नियमित होंगे ध्यान करने में, उतनी अधिक गहराई आप प्राप्त करेंगे।


 ध्यान ऐसी नाजुक चीज है कि इसे बढ़ने के लिए महीनों लगते हैं लेकिन सिर्फ एक या दो दिन में कुम्हला जाती है। एक नाजुक चीज़ को बहुत नियमितता, निरंतरता की आवश्यकता होती है।


ध्यान उच्चतम है; सब कुछ निम्नतम है। एक दिन नींद नहीं ली तो आप ज्यादा कुछ नहीं खोते है। बगैर नींद के कोई भी पांच से सात दिन तक रह सकता है। अगर आप भोजन करना छोड़ते है तो भी ठीक है; आदमी तीन महीने तक भोजन के बिना जीवित रह सकता है।


आप एक दिन के लिए पीने के पानी के बिना जी सकते हैं; आपकी मौत नहीं होगी। लेकिन आम तौर पर लोग इस तरह की शुद्र चीजों को ज्यादा महत्व देते हैं और सोचते हैं कि एक या दो दिन तक वे वास्तव में महत्वपूर्ण चीजों के बिना रह सकते हैं। लेकिन यह याद रखें, कि यदि आप अपने दिनचर्या की छोटी चीजों को पूरा नहीं करेंगे तो कुछ भी नहीं बिगड़ेगा।


आप उन्हें करने से कुछ भी प्राप्त नहीं करेंगे; और न ही उन्हें न करने से आप कुछ खोनेवाले है।


लेकिन ध्यान उच्चतम है, और इसके माध्यम से दिव्य की प्राप्ती होती है।


*यदि आप ध्यान नहीं करते हैं, तो आप नहीं जान पाएंगे कि आप क्या पाना चाहते थे और आपने क्या खोया; आप वास्तव में नहीं जान पाएंगे कि आपने क्या खो दिया है।*


लोगों का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि उन्हें पता हीं नहीं चलता कि उन्होंने क्या खोया है।


खोने के अलावा, लोगों को कभी पता ही नहीं चलता कि वे क्या हासिल करना चाहते थे, वे इसके बारे में कभी सजग ही नही होते।


तो इसलिए हमेशा ध्यान के लिए ऊर्जा समर्पित करनी चाहिए।


ओशो

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