ओशो : प्रतीक्षा करना सीखो।
प्रतीक्षा करना सीखो। धैर्यवान बनो और यकीन करो कि अस्तित्व तुम्हें वह सब देगा जिसे लेने तुम तैयार हो, तुम्हें सिर्फ गहरे ध्यान में चले जाना है। मस्तिष्क के परे मौन में।न कोई विचार रहे,न मनोभाव न मूड, केवल एक मौन सजगता और प्रतीक्षा रहे, उसके लिए जो अस्तित्व तुम्हारे लिए खोज कर लाता है जिसके लिए तुम तैयार हो।
ओशो
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