ओशो : जागरण
जागरण
तुम्हारे स्वपन में भी सत्य कि छाया पड रही है और तुम्हारी नींद में भी जागरण का बीज पडा़ है । वहीं से अंकुरित होगा । और जीवन ही एकमात्र अवसर है ।
भागो मत, भागना आसान है । इस जीवन को ही जीओ। और धीरे धीरे समझपूर्वक जीओ :
-- कि मैं क्या कर रहा हूँ?
क्यों कर रहा हूँ?
और मुझे इस जीवन से क्या मिल रहा है?
अगर सुख मिल रहा है तो खूब जीओ,
जी भर कर जीओ!
और अगर दुख मिल रहा है,
तो जिस जिस चीज से दुख मिल रहा है,
उसको विसर्जित करो।
काश, तुम जरा चुनाव करने लगो!
ओशो
रहिमन धागा प्रेम का
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