ओशो : ऊर्जावान ध्यान कक्ष
ऊर्जावान ध्यान कक्ष
जिस कमरे में आप करें इस प्रयोग को, अगर उस कमरे को संभव हो सके आपके लिए, तो फिर इसी प्रयोग के लिए रखें, उसमें कुछ दूसरा काम न करें।
छोटी कोठरी हो, ताला बंद कर दें, उसमें सिर्फ यही प्रयोग करें। और अगर घर के दूसरे लोग भी उसमें आना चाहें तो वह प्रयोग करने के लिए आएं तो ही आ सकें, अन्यथा उसे बंद कर दें।
नहीं संभव हो सके तो बात अलग है। संभव हो सके तो इसके बहुत फायदे होंगे। वह कमरा चार्जड हो जाएगा।
वह रोज आप जब उसके भीतर जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि साधारण कमरा नहीं है।
क्योंकि हम पूरे समय अपने चारों तरफ रेडिएशन फैला रहे हैं। हमारे चारों तरफ हमारी चित्त—दशा की किरणें फिंक रही हैं। और कमरे और जगहें भी किरणों को पी जाती हैं।
और इसीलिए हजारों—हजारों साल तक भी कोई जगह पवित्र बनी रहती है।
उसके कारण हैं। अगर वहां कभी कोई महावीर या बुद्ध या कृष्ण जैसा व्यक्ति बैठा हो, तो वह जगह हजारों साल के लिए और तरह का इम्पैक्ट ले लेती है, उस जगह पर खड़े होकर आपको दूसरी दुनिया में प्रवेश करना बहुत आसान हो जाता है।
तो जो संपन्न हैं……. और संपन्न का मैं तो एक ही लक्षण मानता हूं कि उसके घर में मंदिर हो सके, बस वही संपन्न है, बाकी सब दरिद्र ही हैं।
घर में एक कमरा तो मंदिर का हो सके, जो एक दूसरी दुनिया की यात्रा का द्वार हो।
वहां कुछ और न करें। वहां जब जाएं, मौन जाएं; और वहां ध्यान को ही करें। और घर के लोगों को भी धीरे— धीरे उत्सुकता बढ़ जाएगी, क्योंकि आप में जो फर्क होने शुरू होंगे वे दिखाई पड़ने लगेंगे।
अब यहां जिन दो—चार लोगों को कीमती फर्क हुए हैं, दूसरे लोगों ने उनसे जाकर पूछना शुरू कर दिया कि आपको क्या हो गया है!
उन्होंने मुझसे भी आकर कहा कि हम क्या जवाब दें? हमसे लोग पूछ रहे हैं कि क्या हो गया है!
तो वे आपके घर के बच्चे, आपकी पत्नी, पति, पिता, बेटे, वे सब पूछने लगेंगे, मित्र पूछने लगेंगे कि क्या हो रहा है! वे भी उत्सुक होंगे।
और अगर इस प्रयोग को जारी रखते हैं तो दूर नहीं वह क्षण जब आपके जीवन में घटना घट सकती है—जिस घटना के लिए अनंत जन्मों की यात्रा करनी होती है, और जिस घटना के लिए अनंत जन्मों तक हम चूक सकते हैं।
*जिन खोजा तिन पाइयां*
ओशो
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